डिजिटल जनजातीय सांस्कृतिक अभिलेख

हमारी विरासत, हमारी पहचान

झारखंड की जनजातीय संस्कृति, लोकगीत, भाषाओं, परंपराओं, कहानियों और जीवंत सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का एक डिजिटल प्रयास।

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सांस्कृतिक स्मृतियों को जीवित रखना

जनधरोहर झारखंड की जनजातीय समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को दस्तावेजित, संरक्षित और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का एक डिजिटल प्रयास है।

लोकगीतों, मौखिक इतिहास, भाषाओं, त्योहारों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों, रीति-रिवाजों और ग्राम्य जीवन की सांस्कृतिक स्मृतियों को एक स्थान पर संजोया जा रहा है।

हमारे कार्य के बारे में जानें

समुदाय सर्वोपरि

सांस्कृतिक ज्ञान उन समुदायों की धरोहर है जो उसे पीढ़ियों से जीवित रखते आए हैं। हमारा प्रयास सम्मान, सहमति और सामुदायिक सहभागिता पर आधारित है।

32 जनजातियाँ
640 लोकगीत
200 कलाकार
100 गाँव

हमारी जनजातियाँ

झारखंड की विविध जनजातीय समुदायों की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को जानें।

लोकगीतों में जीवित हमारी विरासत

पारंपरिक लोकगीतों में त्योहारों, ऋतुओं, कृषि, रिश्तों, आध्यात्मिकता और सामुदायिक जीवन की स्मृतियाँ संजोई होती हैं।

गीत अभिलेख देखें
विशेष लोकगीत
पारंपरिक फसल गीत

मुंडा • राँची

सांस्कृतिक विरासत

झारखंड की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को अलग-अलग रूपों में जानें।

संगीत एवं वाद्ययंत्र

पारंपरिक वाद्ययंत्रों, संगीत परंपराओं और लोकगीतों की जानकारी।

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पर्व एवं परंपराएँ

त्योहारों, ऋतुओं, अनुष्ठानों और सामुदायिक परंपराओं के बारे में जानें।

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मौखिक इतिहास

पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती कहानियों और सांस्कृतिक स्मृतियों का संग्रह।

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आपकी कहानी भी हमारी धरोहर है

क्या आपके पास कोई पुराना लोकगीत, कहानी, तस्वीर, रिकॉर्डिंग या सांस्कृतिक स्मृति है जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए?